कोलंबो: भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को एक नई मजबूती मिली है। भारत ने श्रीलंका को उसकी आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास और पुनर्निर्माण के तहत 250 मीट्रिक टन (MT) से अधिक वजन वाले बेली ब्रिज (Bailey Bridges) की एक नई खेप सौंपी है। यह सहायता श्रीलंका में प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त हुई कनेक्टिविटी को बहाल करने के लिए भारत के व्यापक प्रयासों का एक अहम हिस्सा है।
आधिकारिक हस्तांतरण समारोह
कोलंबो में आयोजित एक विशेष आधिकारिक समारोह के दौरान, श्रीलंका में भारत के उप उच्च आयुक्त मैत्रेय के. ने इन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा सामग्रियों को श्रीलंका के सहकारिता विकास उप मंत्री उपाली समरसिंघे को आधिकारिक तौर पर सौंपा। इस बात की जानकारी श्रीलंका में स्थित भारतीय उच्च आयोग ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की है।
भारतीय उच्च आयोग के अनुसार, यह आपूर्ति भारत द्वारा घोषित 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापक पुनर्निर्माण पैकेज का एक मुख्य घटक है। इन ब्रिजों के लगने से देश के दूर-दराज और अलग-थलग पड़े समुदायों को फिर से मुख्य मार्ग से जोड़ा जा सकेगा, जिससे परिवहन और यातायात की बाधाएं दूर होंगी।
भारतीय सेना के इंजीनियर करेंगे स्थापना
इस परियोजना की प्रमुख विशेषता यह है कि इन बेली ब्रिजों को केवल प्रदान ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि इन्हें श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों में भारतीय सेना के इंजीनियरों द्वारा जमीन पर स्थापित भी किया जाएगा। इससे निर्माण कार्य में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर संपर्क मार्ग सुचारू रूप से काम करने लगेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे के इस त्वरित पुनर्स्थापना से श्रीलंका की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन तेजी से सामान्य हो सकेगा।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति
यह महत्वपूर्ण कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रणनीतिक और विकासात्मक सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (Neighbourhood First) नीति और 'विजन महासागर' (Vision MAHASAGAR) के तहत दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक जुड़ाव लगातार गहरा हो रहा है। हाल ही में उच्च-स्तरीय कूटनीतिक दौरों के दौरान भी दोनों देशों ने आपसी विकास परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया था।
भारत की यह निरंतर सहायता एक बार फिर साबित करती है कि वह संकट और पुनर्निर्माण के प्रत्येक चरण में अपने करीबी पड़ोसी श्रीलंका के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
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