शाहजहांपुर:
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। शाहजहांपुर जिला कारागार (जेल) के भीतर एक विचाराधीन बंदी की मौत ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस दुखद घटना के बाद जहाँ एक ओर जेल की सुरक्षा व्यवस्था और अंदरूनी हालात गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं, वहीं दूसरी ओर मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का आरोप है कि जेल प्रशासन की लापरवाही से जान गई है। वहीं, दूसरी तरफ जेल प्रशासन का दावा है कि बंदी गंभीर बीमारी से पीड़ित था और उसका इलाज चल रहा था।
कौन था मृतक सुधीर सिंह और क्या था पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, जिला कारागार में जान गंवाने वाले बंदी की पहचान सुधीर सिंह के रूप में हुई है। मृतक सुधीर सिंह शाहजहांपुर जिले के रोजा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुदूर ग्रामीण इलाके रामापुर बरकतपुर गांव का रहने वाला था। इस अचानक हुई दुर्घटना के बाद से उसके पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
सूत्रों और पुलिस से प्राप्त विवरण के मुताबिक, सुधीर सिंह रोजा थाने में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में जेल में निरुद्ध था। एक पुराने मुकदमे के सिलसिले में अदालत द्वारा वारंट जारी होने के संबंध में कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे बीती 29 जुलाई को न्यायालय संख्या तीन (Court No. 3) के विशेष आदेश पर जिला कारागार भेजा गया था। परिवार के सदस्यों का दावा है कि जब उसे जेल भेजा गया था, तब वह शारीरिक और मानसिक रूप से ठीक था।
जेल प्रशासन का पक्ष: लीवर की बीमारी से ग्रसित था सुधीर
इस पूरे मामले पर जेल अधीक्षक जेपी तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बंदी सुधीर सिंह पिछले काफी समय से लीवर संबंधी गंभीर बीमारी से ग्रसित था। बीमारी के चलते उसका इलाज पहले से ही लखनऊ से चल रहा था।
जेल अधीक्षक के मुताबिक, कारागार में आने के बाद जब उसकी हालत बिगड़ी, तो उसे गत 4 अगस्त से ही जेल अस्पताल में भर्ती कर लगातार चिकित्सीय देखरेख और इलाज दिया जा रहा था। रात के समय अचानक बंदी सुधीर सिंह की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद जेल प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए उसे तुरंत उपचार के लिए शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज भेजा। वहाँ डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजनों का फूटा आक्रोश और गंभीर आरोप
दूसरी ओर, जेल के भीतर बंदी की मौत की खबर जैसे ही उसके पैतृक गांव रामापुर बरकतपुर और अन्य संबंधियों तक पहुँची, ग्रामीण और रिश्तेदार बड़ी संख्या में जिला अस्पताल तथा जेल के बाहर एकत्र हो गए। परिजनों का आरोप है कि जेल प्रशासन की लापरवाही और क्रूरता के कारण ही सुधीर की जान गई है। उन्होंने जेल के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
प्रशासनिक हलचल, भारी पुलिस बल तैनात और आगे की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए। जेल और जिला अस्पताल के बाहर बढ़ते तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने शोकाकुल और आक्रोशित परिजनों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया तथा उन्हें मामले की निष्पक्ष जांच का पूरा भरोसा दिलाया है। नियमानुसार, किसी भी बंदी की हिरासत के दौरान हुई मौत के मामले में मजिस्ट्रेट जांच के कड़े प्रावधान होते हैं। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर विधिक प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी इस संवेदनशील मामले की हर पहलू से गहनता से छानबीन कर रहे हैं।
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